असम में समान नागरिक संहिता की पहल
असम सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए विधानसभा में संबंधित विधेयक पेश किया है। संसदीय कार्य मंत्री Atul Bora ने सोमवार को यह विधेयक सदन में प्रस्तुत किया। प्रस्तावित कानून में बहुविवाह पर रोक, विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण तथा लिव-इन रिलेशनशिप के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को अधिक कानूनी सुरक्षा प्रदान करना तथा पारिवारिक विवादों को कम करना है। विशेष रूप से बहुविवाह पर प्रतिबंध को महिला अधिकारों और लैंगिक समानता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। वहीं लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी दायरे में लाने के पीछे सरकार की दलील है कि इससे संबंधों में पारदर्शिता बढ़ेगी और विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
हालांकि, विधेयक का सबसे चर्चित पहलू यही है कि लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य होगा। यदि कोई संबंध गुप्त रखा जाता है या उसका पंजीकरण नहीं कराया जाता, तो दंडात्मक प्रावधान लागू हो सकते हैं। इस मुद्दे पर सामाजिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता में हस्तक्षेप हो सकता है, जबकि सरकार इसे सामाजिक जवाबदेही से जोड़ रही है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य के अनुसूचित जनजातीय समुदायों और उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है। इससे सरकार ने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि असम की सांस्कृतिक और जनजातीय विविधता का सम्मान बरकरार रहेगा। आने वाले दिनों में इस विधेयक पर विधानसभा और समाज दोनों में व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
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